अफ्रीकन स्वाइन फीवर

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अफ्रीकन स्वाइन फीवर

जयपुर के रेनवाल कस्बे में पिछले 2 माह से सूअरों की मृत्यु हो रही है जिसकी जाँच रिपोर्ट आने के बाद सूअरों में “अफ्रीकन स्वाईन फीवर” रोग की पुष्टि हुई है। राजस्थान सरकार ने इस रोग की समीक्षा बैठक में अधिकारीयों को निर्देशित करते हुए कहा कि विभाग की समस्त फील्ड संस्थाओं एवं जिला कार्यालयों को इस रोग के प्रति संवेदी बनाया जाये तथा रोग सर्वेक्षण, निदान, रोग प्रकोप की स्थिति में त्वरित कार्यवाही निष्पादित करना सुनिश्चित किया जाए।

अफ्रीकन स्वाईन फीवर क्या है ?

अफ्रीकन स्वाईन फीवर शूकर वंषीय पशुओं में होने वाला संक्रामक, संसर्गजन्य तथा अत्यंत घातक रोग है, जिसकी मृत्यु दर 90 से 100 प्रतिशत है। इस रोग का प्रकोप सर्वप्रथम केन्या में वर्ष 1921 में हुआ, उसके उपरांत यह रोग सब-सहारन अफ्रीका, करेबियन तथा यूरोपीय क्षेत्र सहित कई अन्य देशों में पाया जाता रहा है। वर्ष 2020 के प्रारंभ में यह रोग भारत में सर्वप्रथम उत्तर पूर्वी राज्य असम, अरूणाचल प्रदेश में पाया गया। पूर्व में यह रोग एक्सोटिक रोग के रूप में रहा तथा अब देश के कई भागों में इस रोग के प्रकोप घटित हुये है।

रोग का उपचार

यह रोग शूकर वंशीय पशुओं में होने वाला अत्यंत घातक रोग है जिसमे पशु की बिना लक्षणों के अथवा लक्षण दिखाई देने के अल्प समय पश्चात् ही मृत्यु हो जाती है। इस रोग के लिये रोग कोई प्रतिरोधक टीका उपलब्ध नहीं है। जैव सुरक्षा उपायों के माध्यम से ही इस रोग से पशुओं को बचाया जा सकता है।

राज्य में अफ्रीकन स्वाईन फीवर रोग की स्थिति

पशुपालन विभाग द्वारा कुल 6 ज़िलों को रोग संक्रमित घोषित किया है, जिसमें अलवर, सवाईमाधोपुर, जयपुर, भरतपुर, कोटा, करौली ज़िले शामिल है।

अफ्रीकन स्वाइन फीवर / अफ्रीकन स्वाइन फीवर

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