इतिहास

महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया | धरती धोरां री

श्री कन्हैयालाल सेठिया

महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया का जन्म 11 सितम्बर 1919 को राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ शहर में हुआ।|श्री कन्हैयालाल सेठिया आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिन्दी व राजस्थानी लेखक थे। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य रचना ‘पाथल व पीथल’ है। राजस्थान में सामंतवाद के ख़िलाफ़ इन्होंने जबरदस्त मुहिम चलायी थी और पिछड़े वर्ग को आगे लाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। स्वतन्त्रता …

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महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया | धरती धोरां री

अरै घास री रोटी ही जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो

महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया द्वारा रचित पातल’र पीथल मूल राजस्थानी में लिखी अति लोकप्रिय और चर्चित कविता हैं | अरै घास री रोटी ही जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो। नान्हो सो अमर्यो चीख पड्यो राणा रो सोयो दुख जाग्यो। हूं लड्यो घणो हूं सह्यो घणो मेवाड़ी मान बचावण नै, हूं पाछ नहीं राखी रण में …

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श्री अर्जुन लाल सेठी

अर्जुनलाल सेठी

1880 ई. में जयपुर में जन्मे अर्जुनलाल सेठी प्रारंभिक काल में चौमू ठिकाने के कामदार नियुक्त हुए। किन्तु देशभक्ति की भावना के कारण अपने पद से त्याग पत्र देकर उन्होंने 1906 ई. में जैन शिक्षा प्रचारक समिति की स्थापना की, जिसके तत्वाधान में जैन वर्धमान पाठशाला स्थापित की गई। 1907 ई. में अजमेर में जैन …

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विजय सिंह पथिक

बिजौलिया आंदोलन का नेतृत्वकर्ता विजय सिंह पथिक का मूल नाम भूपसिंह था। उनका जन्म बुलन्दशहर जिले के ग्राम गुठावली कलाँ के एक गुर्जर परिवार में हुआ था। उनके दादा इन्द्र सिंह बुलन्दशहर स्थित मालागढ़ रियासत के दीवान (प्रधानमंत्री) थे जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी। बिजौलिया …

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झालावाड़ की बौद्ध गुफाएं

भगवान बुद्ध कभी राजस्थान नहीं आये किंतु उनके निर्वाण के बाद के 1000 सालों में राजस्थान बौद्ध धर्म के बहुत बड़े केन्द्र के रूप में उभरा। यह एक विस्मयकारी बात थी कि जब गुप्त शासक चौथी शताब्दी ईस्वी के मध्य से लेकर छठी शताब्दी ईस्वी के मध्य तक पूरे भारत में वैष्णव धर्म का प्रचार-प्रसार …

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वागड़ की होली

ग-तरंग-उमंग के साथ होली। इसमें अनूठी लोक परम्पराओं, मान्यताओं व रीति-रिवाजों का मेल । त्योहार एक, लेकिन लोक परम्पराओं के साथ हर क्षेत्र की अलग फाल्गुनी बयार । कुछ ऐसी ही अनूठी परम्पराओं के रंगों में घुली है वागड़ की होली । वागड़ के बांसवाड़ाव डूंगरपुर में होली से जुड़ी कई प्रथाएं व परम्पराएं हैं, …

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