श्री कन्हैयालाल सेठिया

महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया | धरती धोरां री

महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया का जन्म 11 सितम्बर 1919 को राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ शहर में हुआ।|श्री कन्हैयालाल सेठिया आधुनिक काल के प्रसिद्ध हिन्दी व राजस्थानी लेखक थे। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध काव्य रचना ‘पाथल व पीथल’ है।

राजस्थान में सामंतवाद के ख़िलाफ़ इन्होंने जबरदस्त मुहिम चलायी थी और पिछड़े वर्ग को आगे लाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक, दार्शनिक तथा राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कवि एवं लेखक के रूप में कन्हैयालाल सेठिया को अनेक सम्मान, पुरस्कार एवं अलंकरण प्राप्त हुए थे। भारत सरकार द्वारा इन्हें ‘पद्म श्री’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। राजस्थान सरकार ने उन्हें मरणोपरांत राजस्थान रत्न से सम्मानित किया |

श्री कन्हैयालाल सेठिया की कुछ कृतियाँ

राजस्थानी

रमणियां रा सोरठा , गळगचिया , मींझर , कूंकंऊ , लीलटांस , धर कूंचा धर मंजळां , मायड़ रो हेलो , सबद , सतवाणी , अघरीकाळ , दीठ , क क्को कोड रो , लीकलकोळिया एवं हेमाणी |

हिन्दी

वनफूल , अग्णिवीणा , मेरा युग , दीप किरण , प्रतिबिम्ब , आज हिमालय बोला, खुली खिड़कियां चौड़े रास्ते , प्रणाम , मर्म , अनाम, निर्ग्रन्थ , स्वागत , देह-विदेह , आकाशा गंगा , वामन विराट , श्रेयस , निष्पति एवं त्रयी ।

उर्दू

ताजमहल एवं गुलचीं ।

प्रमुख रचनाएं:

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